Skip to main content

Followers

प्रथम पीढ़ी के युवा अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता कल्याण एवं न्यायिक अधोसंरचना को लेकर मुख्य न्यायाधिपति के समक्ष रखा व्यापक ज्ञापन : प्रेस विज्ञप्ति

 

लॉकर सुविधा से लेकर सिटी बस सेवा और न्यायिक निर्णयों के सरल निर्वचन हेतु सिंगल विंडो सिस्टम की पहल को लेकर माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय छत्तीसगढ़ श्री रमेश सिन्हा जी के समक्ष 

आवेदन-पत्र सह ज्ञापन प्रस्तुत

बिलासपुर, 01 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में प्रैक्टिस कर रहे युवा एवं प्रथम पीढ़ी के अधिवक्ताओं के बौद्धिक मंच “अभिव्यक्ति – द एडवोकेसी एंड रिसर्च फोरम” की ओर से अधिवक्ता कल्याण, न्यायिक अधोसंरचना एवं न्याय तक सुगम पहुंच से संबंधित विभिन्न रचनात्मक सुझावों को लेकर माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय के समक्ष आवेदन-पत्र सह ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

फोरम के संयोजक एवं अधिवक्ता सत्येन्द्र प्रकाश सूर्यवंशी ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने विधि के विकास, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, नागरिक अधिकारों के संरक्षण तथा न्याय तक त्वरित एवं प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी न्यायिक परंपरा को और अधिक सुदृढ़ एवं अधिवक्ता हितैषी बनाने के उद्देश्य से युवा अधिवक्ताओं द्वारा यह रचनात्मक पहल की गई है।

ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्न सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं—

1. अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षित लॉकर सुविधा:
ऐसे नियमित अधिवक्ता जिन्हें चैम्बर उपलब्ध नहीं हो पाता, उनके लिए न्यायालय परिसर में सुरक्षित एवं व्यवस्थित लॉकर सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है, ताकि लैपटॉप, गाउन, विधिक दस्तावेज, पुस्तकें एवं अन्य आवश्यक सामग्री सुरक्षित रखी जा सके।

2. मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी में सुधार:
उच्च न्यायालय परिसर के कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों का तकनीकी परीक्षण कर आवश्यकतानुसार अधिकृत स्थानों पर नेटवर्क सुधारक प्रणाली स्थापित करने का अनुरोध किया गया है।

3. टाइपिंग ब्लॉक का आधुनिकीकरण एवं दक्षता:
टाइपिंग ब्लॉक में आधुनिक कंप्यूटर, उच्च गति इंटरनेट, पर्याप्त कार्यस्थल एवं बैठने की व्यवस्था विकसित करने तथा संबंधित ऑपरेटरों की पहचान, पंजीयन एवं दक्षता के संबंध में पारदर्शी मानक निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।

4. अधिवक्ता संरक्षण एवं कल्याण योजनाओं का विस्तार:
देश के अन्य उच्च न्यायालयों एवं न्यायिक संस्थानों में संचालित प्रभावी अधिवक्ता कल्याण योजनाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी व्यवहारिक एवं विधिसम्मत योजनाएं विकसित करने का आग्रह किया गया है। विशेष रूप से युवा, नवोदित एवं प्रथम पीढ़ी के अधिवक्ताओं के लिए संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

5. नेहरू चौक से उच्च न्यायालय तक सिटी बस सेवा:
बिलासपुर के केंद्रीय क्षेत्र, विशेषकर नेहरू चौक से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय परिसर तक नियमित, सुरक्षित एवं किफायती सिटी बस सेवा प्रारंभ करने हेतु संबंधित सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष आवश्यक पहल किए जाने का अनुरोध किया गया है। इससे निम्न एवं मध्यमवर्गीय तथा प्रथम पीढ़ी के अधिवक्ताओं को आवागमन में आर्थिक राहत मिलने की अपेक्षा है।

6. न्यायिक निर्णयों के सरल एवं अधिकृत निर्वचन हेतु सिंगल विंडो सिस्टम:
न्यायालय द्वारा पारित निर्णयों का सामान्य नागरिकों एवं पक्षकारों के लिए सरल भाषा में अधिकृत अर्थ, प्रभाव एवं अनुपालन संबंधी मूलभूत जानकारी उपलब्ध कराने हेतु न्यायालय परिसर अथवा अधिकृत डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से “Single Window System” विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इससे Access to Justice को अधिक सुलभ एवं पारदर्शी बनाने में सहायता मिलेगी।

फोरम ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत ज्ञापन किसी प्रकार की शिकायत या असंतोष का माध्यम नहीं है, बल्कि न्यायिक अधोसंरचना को अधिक आधुनिक, सुविधाजनक, पारदर्शी एवं अधिवक्ता हितैषी बनाने की दिशा में एक रचनात्मक प्रयास है।

फोरम के संयोजक अधिवक्ता सत्येन्द्र प्रकाश सूर्यवंशी ने कहा कि प्रथम पीढ़ी के अधिवक्ताओं के लिए न्यायिक क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करना अनेक व्यावहारिक चुनौतियों से भरा होता है। ऐसे में बेहतर संस्थागत सुविधाएं एवं कल्याणकारी योजनाएं युवा अधिवक्ताओं के व्यावसायिक विकास के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था की कार्यकुशलता को भी मजबूत करेंगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तुत सुझावों पर उचित स्तर पर विचार होगा और भविष्य में छत्तीसगढ़ की न्यायिक व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, सुलभ एवं अधिवक्ता हितैषी बनाने की दिशा में सार्थक पहल होगी।

जारीकर्ता:

सत्येन्द्र प्रकाश सूर्यवंशीअधिवक्ता एवं सामजिक उद्यमी {एम.टेक. (औद्योगिक अभियांत्रिकी एवं प्रबंधन), एम.एससी. (गणित)एम.एस.डब्ल्यू. (समाज कार्य), एम.ए.(राजनीति विज्ञान), एम.बी.ए.(प्रबंधन)}

संयोजक – अभिव्यक्ति, द एडवोकेसी एंड रिसर्च फोरम
युवा एवं प्रथम पीढ़ी के अधिवक्तागण का बौद्धिक फोरम
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर
सपर्क : 9630228563

Comments

Popular posts from this blog

सरकंडा में पीड़ित महिला और परिवारजनों पर हमला : (BNS) की धारा 115(2),296,3(5),351(2) अपराध पंजीबद्ध

  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) के अनुसार,  जो कोई भी जानबूझकर किसी को चोट पहुँचाता है, तो उसे एक साल तक की कैद, या ₹ 10,000 तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं ।  यह उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ कोई व्यक्ति यह जानते हुए भी कोई ऐसा काम करता है, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को चोट पहुँच सकती है, जैसे मारपीट या धक्का-मुक्की।   भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा   296   सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकतें या गाने से संबंधित है और इसके लिए तीन महीने तक की कैद, ₹1,000 तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है ।  इसका उद्देश्य सार्वजनिक नैतिकता और शालीनता को बनाए रखना है।  यह धारा सार्वजनिक स्थानों पर किए गए ऐसे कृत्यों को दंडित करती है जो दूसरों को परेशान करने के इरादे से किए जाते हैं।  क्या है अपराध :  कोई भी व्यक्ति जो सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करता है या अश्लील गाना, गाथागीत या शब्द गाता या सुनाता है।   सजा :  तीन महीने तक की कैद या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों।  उद्देश्य :  सार्वजनिक स्थानों पर अश्ली...

चोरी : धारा - 331(4), 305(ए) बीएनएस

चोरी के 2 प्रकरणों को सुलझाने में सरकण्डा पुलिस को मिली सफलता। थाना - सरकंडा जिला - बिलासपुर (छ.ग.) अप.क्र. - 521/2025, धारा - 305(ए) बीएनएस अप.क्र. - 1431/2025, धारा - 331(4), 305(ए) बीएनएस दोनो प्रकरण में पृथक-पृथक मषरूका बरामद कर आरोपी को किया गया गिरफ्तार। आरोपी :- नाम #### उम्र 22 वर्ष निवासी अटल आवास नाग नागिन तालाब के पास बहतराई थाना सरकण्डा, जिला बिलासपुर (छ.ग.)  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) के अनुसार,  कोई भी व्यक्ति जो रात में (सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले) किसी भी ऐसे अपराध को करने के इरादे से गुप्त रूप से घर में घुसता है या सेंध लगाता है, जिसे कारावास से दंडनीय बनाया गया है, तो उसे 5 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है ।  यह एक संज्ञेय (cognizable) और गैर-जमानती (non-bailable) अपराध है।   भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305,  आवास, परिवहन के साधनों या पूजा स्थलों में चोरी से संबंधित है, और यह अपराध के लिए सात साल तक की कैद और जुर्माना का प्रावधान करती है ।  यह धारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 380 का स्थान लेती ह...

चाकू दिखाकर लूट : धारा 309(4),3(5) बीएनएस

सन्दर्भ : अप.क्र. 1197/2025, थाना सिविल लाईन  जिला बिलासपुर छ.ग. धारा 309(4),3(5) बीएनएस।  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 309(4) के अनुसार,  जो कोई भी डकैती करेगा, उसे 10 साल तक के कठोर कारावास और जुर्माने की सज़ा हो सकती है ।  यदि डकैती सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच राजमार्ग पर की जाती है, तो सज़ा को बढ़ाकर 14 साल तक किया जा सकता है।   भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) सामान्य आशय के सिद्धांत से संबंधित है।  इसके अनुसार,  जब कोई आपराधिक कार्य कई व्यक्तियों द्वारा एक सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है, तो उनमें से प्रत्येक व्यक्ति उस अपराध के लिए उसी तरह जिम्मेदार होगा जैसे कि उसने वह अपराध अकेले किया हो ।  इसका मतलब है कि यदि एक समूह के सभी सदस्य मिलकर कोई अपराध करते हैं, तो हर सदस्य को सामूहिक रूप से दोषी माना जाएगा, भले ही उसने अपराध में सीधा योगदान न दिया हो।   ♦ लूटपाट करने वाले ऑटो चालक को थाना सिविल लाईन पुलिस ने किया गिरफ्तार। आरोपीगणो से घटना मे प्रयुक्त ऑटो क्रमाॅक ^^^^^ किया गया जप्त। *नाम आरोपी:ः- * 01. #####...